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चोट लगती है फूल से भी यार
चोट लगती है फूल से भी यार फूल पत्थर की तरह फैंको मत सुर नहीं साज नहीं आवाज़ नहीं अब यूँ गधों की तरह रेंकों मत . जिनावर ...
उबासी सत्यानाश आ गयी .
घोड़े को घास खा गयी जनता को आस खा गयी . जुल्फके नाग हटाये ही थे चंदन की बास आ गयी . जुआरी को ताश खा गयी - गुलाम को रानी रास आ गयी...
तेरे इनकार में दम है .
किसीकी जात में दम है - किसीकी पांत में दम है. किसीकी दौलते चलती किसीके हाथ में दम है . ना तेरे प्यार में दम है ना मेरे प्यार में...
Sunday, July 14, 2013
ना निराश हो - ऐ मौत मेरी .
उफ्फ्फ -
अभी तो -
काम बहूत हैं .
जरा फुर्सत नहीं है -
मरने की .
किसी रोज़ तुझे भी
लगायेंगे गले
ना निराश हो -
ऐ
मौत मेरी .
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