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Thursday, August 10, 2017

झक दुपहरी में एक दीप जलाया जाये

सूने गुलशन को इस तरह सजाया जाए
महक नही तो थोड़ा इत्र मिलाया जाए .
टिकाऊ न सही कुछ देर तो जले यारो
झक दुपहरी में एक दीप जलाया जाये .
दुआएं देंगी किसी की बुझती आंखें
सोचता हूँ जरा सा पुण्य कमाया जाए .
किसीकी डूबती हसरत कुछतो पूरी हों
खुदाकी नेमतों का कुछ कर्ज़ उतारा जाए .
एक रिश्ता नायाब दिलसे बनाया जाए
न हो घरमें तो बाज़ार से लाया जाए .

Friday, June 10, 2016

आँधियों के दौर हर मंज़र उदास है -
बचने की भला अब किसको आस है
अंजाम से डरे हुए कुछ लोग तो मिले
अंजाम बदल दें मुझे उसकी तलाश है .