समंदर - जलधर नहीं है, वे तो मेघ होते हैं - धरती की प्यास को बुझाते हैं पर जल भरने तो हर बार समंदर के पास ही आते हैं . इतनी विषमतायें ...
Thursday, May 26, 2011
रात मुरझाई हुई सी
रात मुरझाई हुई सी , दिन दहकते अंगार लिए,
जिन्दगी बेवफा सी, कभी बहूत सा प्यार लिए .
यूँ ही कट जाता है जीवन का सफ़र - बस यारो
कारवां रुकता नहीं , मुसाफिर ही ठहर जाते हैं.
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