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Saturday, October 6, 2012

विनय पत्रिका

कब गोपाल कृपा करी हों 
कब आस के दीप जलें उर मेरे .

नन्द का लालजू - मुरली गोपालजू
आओ हृदय मम डालो जी डेरे .

हमसे तुम काहे बिगाड़ करी 
हम कौन से खेत उजाड़े हैं तेरे .

सारा जहाँ तज दिना - सखा  
अब खोया हिया - अपना कित हेरें .

जो अब भी तू कृपा ना करी -
फिर होए मिलन  - बैकुंठ में तेरे .  

1 comment:

  1. गाफिल जी अति व्यस्त हैं, हमको गए बताय ।

    उत्तम रचना देख के, चर्चा मंच ले आय ।

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