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चोट लगती है फूल से भी यार
चोट लगती है फूल से भी यार फूल पत्थर की तरह फैंको मत सुर नहीं साज नहीं आवाज़ नहीं अब यूँ गधों की तरह रेंकों मत . जिनावर ...
तेरे इनकार में दम है .
किसीकी जात में दम है - किसीकी पांत में दम है. किसीकी दौलते चलती किसीके हाथ में दम है . ना तेरे प्यार में दम है ना मेरे प्यार में...
(no title)
आँधियों के दौर हर मंज़र उदास है - बचने की भला अब किसको आस है अंजाम से डरे हुए कुछ लोग तो मिले अंजाम बदल दें मुझे उसकी तलाश है .
Wednesday, April 4, 2012
बात करता है बहूत ख़ास
बात करता है बहूत ख़ास -
बात आम नहीं करता
.
इस देश में - जिसका जो काम है
बस वही - वो काम नहीं करता .
संत्री से प्रधान मंत्री तक
संसद से सड़क तक -
जनपथ से - राजपथ तक
लोग खड़े - बैठे लेटे या
इंडिया गेट के लान में
पड़े पड़े - सुस्ता रहें हैं .
हंस - रोरहे - गा रहें हैं .
सिगरेट बीडी फूंक रहें हैं -
या खैनी खा रहें हैं .
पर वो नहीं कर रहे - जिसका
वेतन या पगार पा रहें हैं .
हाथों में डंडे- झंडे लिए
नारे लगा रहें हैं -
हम विधवाओं की -
मांग भरो / पूरी करो .
बस मांग ही मांग हैं -
सारे के सारे - मदारी हैं
भाई वाह क्या स्वांग है .
मांग पूरी करो - वर्ना मर रहे हैं
कल से रामलीला मैंदान में
सत्याग्रह कर रहें हैं -
ये
अनशन - कोढ़ में
छिपी खाज है .
कोई क्या बिगाड़ लेगा -
सरकार
किसी भी पार्टी की हो -
पर देश में
अपना ही तो राज़ है .
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