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Sunday, November 13, 2011

अब अकेला रह गया हूँ

करोड़ों से हजारों में - और
अब अकेला रह गया हूँ .
तुम्हें अहसास है -मैं
क्या कह गया हूँ .

कहाँ गए सब लोग -
ये क्रांति का कैसा चमत्कार है .
देश में अकेला मैं भलाचंगा-
बाकी सब बीमार हैं .

कहाँ से लाऊँ भला - एक
बाबा या एक अन्ना - पूरी
बारात तो साथ है - पर नहीं है
इसमें कोई एक अदद बन्ना.

बैंड- बाजा - घोड़े हाथी
यूँ तो पूरी फ़ौज है.
सैनिक मरते रहते हैं - वैसे
सेनापति की फुल फुल मौज है .

गांधारी -ध्रतराष्ट्र मंगलगान
गा रहें हैं - यूँ खुद को भरमा रहें हैं
राज्याभिषेक की तैयारी जोरों पर हैं
दुर्योधन के कलयुगी अवतार-
तशरीफ़ ला रहें हैं 

1 comment:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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