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Wednesday, August 17, 2011

सरे शाम - हमने दिया जलाया तो है

सरे शाम - हमने दिया जलाया तो है
मिजाज़ पुरसी को कोई चलके
दूर से आया तो है .

अब देखते हैं - वो क्या है- कैसा है
वो शक्श तेरे लिए कुछ लाया तो है .
बड़ी शिद्दत से मैंने उसे बुलाया तो है .

मैं खो गया था - सरे राह में
मेलों में झमेलों में - किसी ने
मुझे इससे मिलवाया तो है .

कल ख़त का जवाब भी - आएगा जरुर
किसी कातिब से- हुक्काम को
मैंने लिखवाया तो है.

ना सही हक़ - जरा सी लूट सही
दे दो इस गरीब को थोड़ी छुट सही.
मजमून काजीसे पढवाया तो है .

ये मोदी  - कुछ आदमी सा लगता है
खरा सिक्का है -  जैसे टकसाल से
अभी ताज़ा ताज़ा आया तो है .


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