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अब मीनारों पर मीनारें देखिये
आज लहरों में बहा सा देखिये जलोधर है फिर भी प्यासा देखिये बढ़ रही इंसान की आशा यहाँ - रोज़ आशा में निराशा देखिये . अब मीनार...
कविता ह्म्ल नहीं ढोती
कविता ह्म्ल नहीं ढोती गर्भिणी स्त्री की तरह शापित दुखी होती है पर बाँझ भी नहीं होती . बहार की तरह खिलती है और पलभर में पतझर ...
सोनिया गाँधी हो जा
चलते चलते कर गए पूरी गागर खाली . कैसा गाँधी देश - जहाँ उपवन ना माली . इतने सारे लोग - मगर भेजे से खाली जिसको चुन लें यार वही निकले...
Friday, June 10, 2016
आँधियों के दौर हर मंज़र उदास है -
बचने की भला अब किसको आस है
अंजाम से डरे हुए कुछ लोग तो मिले
अंजाम बदल दें मुझे उसकी तलाश है .
Sunday, February 14, 2016
तेरे इनकार में दम है .
किसीकी जात में दम है -
किसीकी पांत में दम है.
किसीकी दौलते चलती
किसीके हाथ में दम है .
ना तेरे प्यार में दम है
ना मेरे प्यार में दम है .
किसीकी ना बिकी चीनी
किसीका बिकगया शीरा
किसीका कांच बिकता है
किसीका ना बिका हीरा .
ना तेरी जीतमें दम है -
ना मेरे हार में दम है .
जमाना सामने हो तो
महूब्बत गौण होती है
मुक्कदर की धनी लैला
तभी तो मौन होती है
मेरा इकरार बेदम है -
तेरे इनकार में दम है .
http://yatranaama.blogspot.com/
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