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चोट लगती है फूल से भी यार फूल पत्थर की तरह फैंको मत सुर नहीं साज नहीं आवाज़ नहीं अब यूँ गधों की तरह रेंकों मत . जिनावर ...
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मंथर गति से - बहती हवा कह रही है - अभी ठहर कुछ देर यहीं रुक जा . ये काले - कजरारे उमड़ते -हुए मेघ . कहाँ जायेगा - चल यहीं बरस जा . ...
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किसीकी जात में दम है - किसीकी पांत में दम है. किसीकी दौलते चलती किसीके हाथ में दम है . ना तेरे प्यार में दम है ना मेरे प्यार में...
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