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अपना कहते भी हो - दूर-दूर रहते भी हो ये कैसा दस्तूर चल पड़ा है आजकल . पसीने की गंध को , खुशबुओं से दूर रख अभी -सोया है फुसफुसा के जरा ...
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भीड़ में गीत याद आते हैं , जहाँ मैं गुनगुना नहीं सकता . है बहुत दूर मंजिले -अपनी क्यों पलट देखता उन्हें ये दिल किसी का दर भी नहीं - अप...
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शब्द समर्थ नहीं होगें - पर भाव कमजोर नहीं है यार . समझने की कौशिश कर , कुछ तो तू कर -विचार . सीमित उम्र और - सफ़र अनंत हो चला, याद कर ...
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