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मैं इन्कलाब बेचता हूँ
बहूत हो गये जो संभलते नहीं अब - पुराना मैं चुकता हिसाब बेचता हूँ . ये नेता गवैये और खेलों के भैये - खरीदो - लो पूरी जमात बेचता हूँ . ख...
प्यार मैंने भी किया है .
विरह की संवेदना मैं भित्तियों के चित्र सी तुम . प्यार तुमने भी किया था प्यार मैंने भी किया है . मरू जलती रेत और वे ओस की नाजुक सी...
जल जायेगी जो लंका है
लहरे उठती हैं गिरती हैं तूफानों की आशंका है . कोई तो राम कहायेगा . ना शक ना कोई शंका है . सुतपवन कोईतो आएगा . जल जायेगी जो ल...
Saturday, March 12, 2011
तू मेरा सफ़र भी है
तू मेरा सफ़र भी है मंजिल भी -
क्या फर्क है -वो हो सुबह शाम या रात
मुझे बता सो सही -घर से कब निकलना है .
अकेले साए का भी चलने में क्या चलना है .
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