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सिरकटी लाशों पे माना सर नहीं हैं
सिरकटी लाशों पे माना सर नहीं हैं , आज तेरी बात के उत्तर नहीं हैं . खींच कर लायी क़ज़ा हमको यहाँ पर जिन्दगी अब मौत से बेहतर नहीं हैं . ...
मुझ पर विश्वाश कर
मुझ पर विश्वाश कर -मैं खुद को अमर कर दूंगा , तुम्हारी मांग मैं - अपने लहू से भर दूंगा . सुबह का आस्मां -और शाम रतनार - मुझे प्रिय है ...
क्षणिकाएँ
आडी तिरछी - टेढ़ी मेढ़ी चाँद सरीखी - रोटी तो मत बेलो लाल अंगारों को भस्म करे जो उस सूरज से खेलो लाल . रतनारे रंगों से रंग दो प...
Friday, June 10, 2016
आँधियों के दौर हर मंज़र उदास है -
बचने की भला अब किसको आस है
अंजाम से डरे हुए कुछ लोग तो मिले
अंजाम बदल दें मुझे उसकी तलाश है .
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