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झक दुपहरी में एक दीप जलाया जाये
सूने गुलशन को इस तरह सजाया जाए महक नही तो थोड़ा इत्र मिलाया जाए . टिकाऊ न सही कुछ देर तो जले यारो झक दुपहरी में एक दीप जलाया जाये . दु...
गीत ये फिर भी -मेरा बिलकुल नया है .
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दस्तक है द्वार पर
दस्तक है द्वार पर - सिंह की पुकार पर , सोचना फिर कभी - शत्रु पर प्रहार कर . ठाड़ा नहीं है सिंह - भय अरण्य पार कर मरना गर है अभीष्ट -दुश्...
Tuesday, June 11, 2013
आदमी देखो जरा सा .
आँधियों तूफ़ान में
निश्चल खड़ा सा
बीहड़ बियाबाँ में
पसरा पडा सा
हैं इरादे पर्वतों की चोटियाँ
और आदमी देखो जरा सा .
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