Popular Posts
दिल के आगे जोर नहीं है
दिल के आगे जोर नहीं है - दिल के आगे चलती ना कुछ . कितना भी समझा फुसला ले - बात मगर यूँ बनती ना कुछ . डर के आगे जीत नहीं है ...
यूँ ना तोडना मुझे
जुड़ना बड़ा मुश्किल है यूँ ना तोडना मुझे . टूटा जो एक बार फिर जुड़ता नहीं हूँ मैं . घर में रखो - दिल में रखो जो चाहे तुम करो . ...
क्षणिकाएं
खलिहान में बढे क्या चार दाने और हाकिम ने खरीदे - हज़ार बारदाने और . कोई मरता नहीं - किसी के साथ जीने वाले के साथ जिया जाता है . जा...
Tuesday, June 11, 2013
आदमी देखो जरा सा .
आँधियों तूफ़ान में
निश्चल खड़ा सा
बीहड़ बियाबाँ में
पसरा पडा सा
हैं इरादे पर्वतों की चोटियाँ
और आदमी देखो जरा सा .
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment