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सुन्दर सत्य अनमोल
ReplyDeleteआना है-जाना है, इस जगत को कहाँ खली रहना है
अभिलाषाओं की दौर में इस कदर अँधे हो गए हैं, कि
जुए खेलने की आदत पद ही गई।
बहुत सुन्दर गुरु जी