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क्षणिकाएं
खलिहान में बढे क्या चार दाने और हाकिम ने खरीदे - हज़ार बारदाने और . कोई मरता नहीं - किसी के साथ जीने वाले के साथ जिया जाता है . जा...
फैंक दे गम पुराने हो गएँ हैं
ख़ुशी की बात कर - अब दिन सुहाने हो गएँ हैं लपेटे कब तलक फिरते रहोगे फैंक दे गम पुराने हो गएँ हैं . मेरे तदबीर के - कुछ और माने हो...
दिल के आगे जोर नहीं है
दिल के आगे जोर नहीं है - दिल के आगे चलती ना कुछ . कितना भी समझा फुसला ले - बात मगर यूँ बनती ना कुछ . डर के आगे जीत नहीं है ...
Tuesday, June 7, 2011
कल्याणकारी शुभकामनाएं ...!!!!
जीवन -शाश्वत -अमित अटूट
अविरल - अविराम .
जीवन अनंत है ....!!!!!
हर पल - इसका मधुरस
भर भर पीयों - क्षणिक नहीं
भरपूर जियों !!!!!!!
उसी जीवन के लिए -
नव नूतन - शुभ्र और
कल्याणकारी शुभकामनाएं ...!!!!
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