दिवाली पर तो नहीं डरता था
आज इतना हल्ला मचाता है .
अबे दो चार बम कोई छुटाए -
उनके धमाकों से -
तू क्यों मरा जाता है .
...
सब खेल है -सियासत है
पटरी से उतरी रेल है .
कितने मर गए - कौन सी
साली लंका ख़ाली कर गए .
अभी तो इतनी फ़ौज है -
चाहे दुश्मनों की मौज है .
चलने दे छोटे मोटे पटाखे -जब
मन आये ये पिटपिट बंद कर दीयों -
सालों के दो चार -थोबड़े पे धर दियो .
तू मर्द है - मर्द को दर्द नहीं होता
सिसकते तो जनखे हैं -आखिर
बिखरते तो माला के मनके हैं .
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आइने कभी झूठ नहीं बोलते - बुत कभी सच नहीं कहते , क्यों की वे अब नहीं है . पर आइने तो यहाँ वहां - सब जगह बिखरे पड़े हैं , हर कही हैं . ...
आक्रोश और दुःख के सिवा जो बचा है वो हौसला |
ReplyDeleteराजनेताओं ने एक बार अपनी टिप्पणियों से फिर छला ||
हर-हर बम-बम
बम-बम धम-धम |
थम-थम, गम-गम,
हम-हम, नम-नम|
शठ-शम शठ-शम
व्यर्थम - व्यर्थम |
दम-ख़म, बम-बम,
तम-कम, हर-दम |
समदन सम-सम,
समरथ सब हम | समदन = युद्ध
अनरथ कर कम
चट-पट भर दम |
भकभक जल यम
मरदन मरहम ||
राहुल उवाच : कई देशों में तो, बम विस्फोट दिनचर्या में शामिल है |