Popular Posts
मैं इन्कलाब बेचता हूँ
बहूत हो गये जो संभलते नहीं अब - पुराना मैं चुकता हिसाब बेचता हूँ . ये नेता गवैये और खेलों के भैये - खरीदो - लो पूरी जमात बेचता हूँ . ख...
प्यार मैंने भी किया है .
विरह की संवेदना मैं भित्तियों के चित्र सी तुम . प्यार तुमने भी किया था प्यार मैंने भी किया है . मरू जलती रेत और वे ओस की नाजुक सी...
जल जायेगी जो लंका है
लहरे उठती हैं गिरती हैं तूफानों की आशंका है . कोई तो राम कहायेगा . ना शक ना कोई शंका है . सुतपवन कोईतो आएगा . जल जायेगी जो ल...
Thursday, April 21, 2011
'हार'
उसने कहा निश्चित हार है -
हमने कहा -बिलकुल बेकार है .
'हार' - हारने वालो को कहाँ .
विजेता ही तो 'हार' का असली -
हकदार है .
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment