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मन को उन्मुक्त छोड़ दो इसे किसी भी दिशा में जाने दो . दसों दिशाओं में यूं ही चक्कर लगाने दो . जबरन -हठात कैद मत करो जो जाता है -उसे ...
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कुछ ऐसा कर की - सिपाही अपनी बन्दुक फैंक दे , और राजा अपना ताज उतार कर जनता के सर पर रखदे . देश -दुनिया की सीमाएं मिट जाएँ/सिमिट जा...
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ऐ मेरे वतन -बता मैं तेरे लिए क्या करूँ ! तेरे लिए जिन्दा रहूँ -या तेरी खातिर मरूं . मेरे सीने में गड़े ये दुश्मनों के तीर टीस अनवरत उठ ...
सुन्दर प्रस्तुति ||
ReplyDeleteदिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक
dineshkidillagi.blogspot.com
होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।