Popular Posts
-
अंतर में छिपे -जहर को मैं क्यों दवा की मानिंद कविता में उडेलता हूँ - हँसते मुस्कुराते चेहरों को क्यों कठोरता के आवरण में धकेलता हूँ . ...
-
क्या हुआ - इस बात पर इतना बबाल क्यों ? नैतिकता का - इस देश में इतना बुरा हाल क्यों . कोई सुरक्षा पर सवाल उठाता है - कोई क़ानून में ...
-
एक नदी प्रवाहमयी - जो दिल में सतत बहती है . कभी पत्थरों की ओट नियति की चोट - दबी छिपी - वेदना संवेदनाओं के बीच जाने कहाँ रहती है . सं...
सुन्दर प्रस्तुति ||
ReplyDeleteदिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक
dineshkidillagi.blogspot.com
होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।