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जिन्दगी अनमोल भी है जिन्दगी बेकार भी है . इक कदम पर जीत भी है दो कदम पर हार भी है . मुश्किलें सागर सी गहरी उलझनें पहाड़ भी है . इ...
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जब अस्तित्व और न्याय के सवाल महत्वपूर्ण हो गए -तब हम जंगल से भाग आये थे . और नए उपवन -कानन सजाये थे पेड़ -पौधे , जंगली घास को हमने अ...
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बैठे ठाले मिले निवाले - मैं भी खाऊँ तू भी खा ले . धरती को बिस्तर कर अपने आसमान को ओढ़ बिछा ले . सिरहाने हों पर्वतमाला - सागर में तू...
सुन्दर प्रस्तुति ||
ReplyDeleteदिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक
dineshkidillagi.blogspot.com
होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।