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बहूत हो गये जो संभलते नहीं अब - पुराना मैं चुकता हिसाब बेचता हूँ . ये नेता गवैये और खेलों के भैये - खरीदो - लो पूरी जमात बेचता हूँ . ख...
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विरह की संवेदना मैं भित्तियों के चित्र सी तुम . प्यार तुमने भी किया था प्यार मैंने भी किया है . मरू जलती रेत और वे ओस की नाजुक सी...
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लहरे उठती हैं गिरती हैं तूफानों की आशंका है . कोई तो राम कहायेगा . ना शक ना कोई शंका है . सुतपवन कोईतो आएगा . जल जायेगी जो ल...
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