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आग की बात मत कर - बरसात का मौसम है . पुरवैया का जोर है - बूंदों का मजा ले ना . रोज रोज - रोने का क्या फायदा है सोच . कभी तो थोड़ा ...
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बहूत हो गये जो संभलते नहीं अब - पुराना मैं चुकता हिसाब बेचता हूँ . ये नेता गवैये और खेलों के भैये - खरीदो - लो पूरी जमात बेचता हूँ . ख...
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एक रिश्ता - बड़ा अनाम सोचता हूँ दूं - उसे कोई अच्छा सा नाम . सावन सा उमड़ता - घुमड़ता रीझता हो . खिजाता हो - खीजता हो . ...
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