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समय की धार में सब बह गया - कभी फुर्सत मिली देखेंगे - तब क्या बचा क्या रह गया . वक्त के पंछी चले उड़ान पर नीड़ धरती पर - और इरादे ...
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बेखबर दुनिया से यारो - बेखबर से हम . ना कोई मिलने की ख़ुशी - ना बिछुड़ने का गम . दिवाली - कभी तो ईद - कभी कोई खाली वार बेमज़ा ख़बरें भरी ह...
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कोई मिल गया था - सरे राह -यूँ ही आते जाते मन खिल गया था -बात करते मिलते मिलाते. मन कह रहा था -ये कोई अपना सा है तर्क कहता था - कोई सप...

बढ़िया भाव ।
ReplyDeleteआभार ।