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प्रेम अनंत है - नफरत का - फिर भी अंत है . बहारें ही शाश्वत हैं पतझर की कल्पना बिलकुल - मनघडंत हैं . दुश्मनी सदा नहीं रहती मित...
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ये भगवान विष्णु क्षीर सागर में - शेष नाग की छतरी तले , कमल की शैया पर क्यों सोते हैं शेषनाग के दाँत तो बहुत विषैले होते है . ये कैसा व...
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आइने कभी झूठ नहीं बोलते - बुत कभी सच नहीं कहते , क्यों की वे अब नहीं है . पर आइने तो यहाँ वहां - सब जगह बिखरे पड़े हैं , हर कही हैं . ...
भावपूर्ण
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