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अंतर में छिपे -जहर को मैं क्यों दवा की मानिंद कविता में उडेलता हूँ - हँसते मुस्कुराते चेहरों को क्यों कठोरता के आवरण में धकेलता हूँ . ...
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क्या हुआ - इस बात पर इतना बबाल क्यों ? नैतिकता का - इस देश में इतना बुरा हाल क्यों . कोई सुरक्षा पर सवाल उठाता है - कोई क़ानून में ...
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एक नदी प्रवाहमयी - जो दिल में सतत बहती है . कभी पत्थरों की ओट नियति की चोट - दबी छिपी - वेदना संवेदनाओं के बीच जाने कहाँ रहती है . सं...
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