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Monday, March 17, 2014

प्यार मैंने भी किया है .

विरह की संवेदना मैं 
भित्तियों के चित्र सी तुम . 
प्यार तुमने भी किया था 
प्यार मैंने भी किया है .

मरू जलती रेत और वे 
ओस की नाजुक सी बुँदे .
आँख में पलता स्वप्न 
साकार मैंने भी किया है .

रूठ जाती हो ना जाने 
सेंकडों करती बहाने .
जाग कर यूँ रात भर  - 
मनुहार मैंने भी किया है .

आज वनिका बन के क्यों
फैलाए बैठी हो बही तुम .
प्यार के अहसास को
व्यापार तुमने ही किया है .

कौन जाने कौन हो तुम
चाहतों का सिलसिला है .
जिन्दगी जीना मेरा -
दुश्वार तुमने ही किया है .

काश मैं ये जान पाता
कोई तो मुझको बताता .
भटकनों में भटक जाता
पर ना तेरी राह आता .







Wednesday, February 26, 2014

एक चिंगारी को - छोटा ना समझ

एक चिंगारी को - 
छोटा ना समझ 
इसमे होता है -
परमाणु का विधान .

वो जिसने सीख कर 
पहचान लिया - 
वही करेगा अब 
इस क्रांति का संधान .

एक चिंगारी लगी - 
भस्मभूति - हुआ 
ये पापाचारी विधान . 

दावानल - ये जंगल
की आग - झुलस के 
मर गये - कई शैतान .

सड़क पे बिखरी   
जवाँ शक्ति उठा 
समेट ले - इन्हें 
दे दे पहचान .

ये बवंडर - 
ये आंधियां तूफ़ान -
पवन चक्की से 
उर्जा शक्ति - 
बन जाए फिर 
पूरा हिंदुस्तान .