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Wednesday, September 7, 2011

कोई मिल गया - शायद


कोई मिल गया - शायद
पुकारा था - उसने बड़ी
शिद्दत से मनुहार से
थके पंखों से -बड़ी
बेबसी में - बहूत प्यार से .

और आ गया था - वो
फ़रिश्ता - स्वर्ग से उतरकर
उस नन्ही जान के-
सपनों में रंग भरने - उसे
गिरने से बचाने- उसे
सहारा देने -ढाढस बंधाने
टूटते साहस को फिर से बढ़ाने.

डूबते को तिनके का सहारा काफी
फिर नए जोश में - आकाश की
ऊँचाइयों को नन्हे परों पर-
तय करने को - मिल गया था
विश्वास जो खो गया था .

कभी कहीं मिले तो

कभी कहीं मिले तो -
तुम्हें बताऊंगा कितने सपने -
मैंने तुम्हारे लिए बुने थे- तुम्हें
जरुर सुनाऊंगा -मेरा
इंतज़ार करना - तुमसे मिलने
जीवन में एकबार - मैं जरुर आऊँगा .

तुम कौन हो - कहाँ हो
कैसे हो - कुछ तो बताओ .
हो सके तो मुझसे मिलने - आज
ही चले आओ - मैंने
आज तक तुम्हारी कल्पनाएँ की हैं
कभी देखा नहीं .

जिन्दगी बहूत छोटी है - हम जिन्दा हैं
ये भी एक भ्रम है - तुम कहीं
आसपास हो - क्या इतना कम है .