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Friday, February 25, 2011

वो मेरा दोस्त

वो मेरा दोस्त भी था भाई भी था ,
कोलाहल भी था ,तन्हाई भी था .
ग़ज़ल भी था ,शहनाई भी था .
जाने क्यों याद आ रहा है-आज ,
मुझ में शामिल ,मेरी परछाई भी था .

वो मेरी जमीं था, आस्मां भी
मेरा हमराज, पूरा दुनिया-जहाँ भी,
बता नहीं सकता -कहाँ कहाँ था वो ,
हर कहीं जहाँ में हूँ -वो वहां भी .

जो मेरे आंसू उठाता था -
गिरने से पहले पलक से.
उसका दिल खिल जाता था मेरी
एक झलक से.

मुझ से बिछड़े हुए उसे अरसा बीता -
मैं रह गया खाली -बिलकुल रीता .
गम आज भी दरवाजा खटखटाते हैं -
मेरे पास रहते हैं -दूर नहीं जाते हैं -

कहाँ से लाऊ उसे -कहाँ सन्देश भेजूं ,
किस को कहूँ -कैसे बुलवाऊँ.
मेरी पीड़ा भरा स्वर -उस तक जाता नहीं
जो चला गया -वो वापिस लौट के आता नहीं .

Monday, January 17, 2011

अब मुमकिन नहीं .

तू कैसे रोक सकता है -
इन बहती हवाओं को .
इन्हें मुठी में कैद करना
अब मुमकिन नहीं .

ये विलायती कीकर -
अब तो पुरे देश में छा गए ,
जिन्हें एक षड्यंत्र के तहद -
अंग्रेज यहाँ लगा गए .

तू चाहे भी तो इन्हें निर्मूल नहीं कर सकता -
अपने नीम पीपल काट दे-जला दे
पर ये कैंसर की कोशिकाएं -अब
मरने वाली नहीं -
एक से अनंत हो जाएँगी -पर
ये मुल्क छोड़ कर कहीं नहीं  जायेंगी .