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एक रिश्ता - बड़ा अनाम सोचता हूँ दूं - उसे कोई अच्छा सा नाम . सावन सा उमड़ता - घुमड़ता रीझता हो . खिजाता हो - खीजता हो . ...
गाँधी का नया अवतार
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आंधियां देश दुनिया घर नहीं देखती
आंधियां देश दुनिया घर नहीं देखती कोई पगडण्डी -सड़क शहर नहीं देखती जमीन से उठती हैं - और छा जाती हैं - आसमान में या सारे जहान में ....
Tuesday, May 7, 2013
चल खेलें - ता था थैया जी .
ओ बर्गरजी - ओ पीजाजी
हे दीदी जी - ओ जीजाजी .
ओ भैया जी - हे मैया जी .
डूबे चुनाव में नैया जी
चल खेलें - ता था थैया जी .
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