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जियो और जीने दो
प्रेम अनंत है - नफरत का - फिर भी अंत है . बहारें ही शाश्वत हैं पतझर की कल्पना बिलकुल - मनघडंत हैं . दुश्मनी सदा नहीं रहती मित...
ये भगवान विष्णु क्षीर सागर में
ये भगवान विष्णु क्षीर सागर में - शेष नाग की छतरी तले , कमल की शैया पर क्यों सोते हैं शेषनाग के दाँत तो बहुत विषैले होते है . ये कैसा व...
आइने कभी झूठ नहीं बोलते
आइने कभी झूठ नहीं बोलते - बुत कभी सच नहीं कहते , क्यों की वे अब नहीं है . पर आइने तो यहाँ वहां - सब जगह बिखरे पड़े हैं , हर कही हैं . ...
Tuesday, May 7, 2013
चल खेलें - ता था थैया जी .
ओ बर्गरजी - ओ पीजाजी
हे दीदी जी - ओ जीजाजी .
ओ भैया जी - हे मैया जी .
डूबे चुनाव में नैया जी
चल खेलें - ता था थैया जी .
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